ऑक्सफोर्ड पब्लिक स्कूल ने मातृ दिवस का आयोजन किया

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◆मां बच्चों की मूक भाषा है : डोला।

◆मां शब्द को किसी दिवस या खास प्रयोजन की जरूरत नहीं : निदेशक।

◆मां का हर दिन शुक्रिया अदा करें : शिवांगी।


News Update By : Rajiv Ranjan

सिटी ब्यूरो रिपोर्ट, संवाद : डॉ० निरंजन कुमार,

जमुई : जमुई शहर का सीबीएसई मान्यता प्राप्त नामदार निजी शिक्षण संस्थान ऑक्सफोर्ड पब्लिक स्कूल ने शनिवार को मातृ दिवस धूमधाम से मनाया।

      जानी - मानी समाजसेविका श्रीमती डोला ने दीप प्रज्वलित कर समारोह का शुभारंभ करते हुए कहा कि मां बच्चों की मूक भाषा है। उन्होंने मशहूर संगीतकार ए. आर. रहमान की पंक्ति को दुहराते हुए कहा कि मैं कभी बतलाता नहीं पर अंधेरे से डरता हूं मैं मां , यूं तो मैं दिखलाता नहीं तेरी परवाह करता हूं मैं मां , तूझे सब है पता , है ना मां , तूझे सब है पता , मेरी मां...।

कुछ ऐसी होती हैं मां , जिसे अपने बच्चों के बारे सब कुछ पता होता है। लेकिन मां खामोशी से अपनी ममता की छाया में बच्चाें की दुनिया को समेटकर रखती है। श्रीमती डोला ने मां की महानता को आत्मिक गहराइयों से लयबद्ध करते हुए कहा कि इसे गौर से सुनकर हम मां की ममता और महानता काे समझ सकते हैं।


 उन्होंने आगे कहा कि मां से बच्चे का रिश्ता दुनिया में सबसे अहम और अनमोल होता है। मां से रिश्ता होने के बाद ही एक बच्चा बड़ा होने तक अपने जीवन में कई और रिश्तों को अपना सकता है। मां की ममता और प्यार हर इंसान के लिए बहुत जरूरी होता है। मां बच्चे की हर जरूरत को बिना किसी स्वार्थ के पूरा करती हैं। वैसे तो मां अपने बच्चे पर अपना पूरा जीवन कुर्बान कर देती हैं। बच्चे की खुशी में खुश और तकलीफों में दर्द बांटती हैं। ऐसे में बच्चे अपनी मां के लिए कुछ खास करना चाहते हैं। श्रीमती डोला ने मातृ दिवस के पावन अवसर पर पाठशाला परिवार को अनंत , अशेष , असीम , अमूल्य , अमिट और अनमोल शुभकामना दी।
   विद्यालय के विद्वान निदेशक डॉ. मनोज कुमार सिन्हा ने रूंआसे गले से समारोह को गरिमा प्रदान करते हुए कहा कि मां शब्द को किसी खास दिवस या प्रयोजन की जरूरत नहीं है। लेकिन मातृ दिवस मां की इसी ममता और प्यार को सम्मान देने का दिन नामित किया गया है। मां शब्द का उल्लेख हमारे वेदों से लेकर सभ्यता संस्कृति में पाया जाता है। डॉ. सिन्हा ने सवालिया लहजे में कहा कि कौन कहता है फरिश्ते स्वर्ग में बसते हैं , कभी अपनी मां को ध्यान से देखा है ? उन्होंने भूमंडल पर भूत , वर्त्तमान और भविष्य की हर मां को प्रणाम किया। जिला संवाददाता डॉ. निरंजन कुमार ने भारी मन से मां की महिमा का बखान करते हुए कहा कि वह त्याग , स्नेह , प्रेम और दया की जीवंत मूर्ति है , जिसकी छाया से मनुष्य ही नहीं वरन देवता भी स्वयं को आनंदित अनुभव करते हैं।
    उन्होंने देवी तुल्य मां को चरणस्पर्श किया। उप प्राचार्य शिवांगी शरण ने मौके कहा कि केवल इसी दिन ही नहीं वरन नित्य दिन हमें अपनी मां का शुक्रिया अदा करना चाहिए , जिसने हमें हमारा अस्तित्व प्रदान किया। उन्होंने उपस्थित जनों को मातृ दिवस की महत्ता समझाई और मां को हॄदयतल से प्रणाम किया।   विदुषी शिक्षिका सुजाता कुमारी, सुमन कुमारी, नीलम वर्णवाल, अंजना, प्रेमलता, पॉली कुमारी, डेजी सिन्हा, मिक्की कुमारी , विद्वान शिक्षक नीरज सिन्हा,  लव कुमार ,  कुश कुमार , शैलेश झा आदि ने भी मातृ दिवस पर मजबूत उपस्थिति दर्ज की और अमूल्य वाणी से स्वजनों के मस्तिष्क को झकझोर दिया।
    स्कूल की बेटी श्रेया और बेटा सुमन ने शायराना अंदाज में कार्यक्रम का संचालन किया और खूब तालियां बटोरी।
    प्राचार्य ऋतुराज सिन्हा ने अतिथियों का इस्तकबाल गर्मजोशी से किया वहीं सचिव कुसुम सिन्हा ने धन्यवाद ज्ञापन कर उद्घाटन सत्र के समापन की घोषणा की। 
         मातृ दिवस के दूसरे सत्र में रोचक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया , जिसमें पाठशाला की बेटियों ने सामयिक गीत और नृत्य प्रस्तुत कर उपस्थित जनों का भरपूर मनोरंजन किया और कार्यक्रम को यादगार बनाया। इस अवसर पर फन गेम्स का भी आयोजन किया गया , जिसमें मौजूद मां ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया और इसे भव्यता प्रदान की। कार्यक्रम उल्लास और उमंग के वातावरण में संपन्न हुआ।

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